नवदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गोवर्धन पर्वत और छप्पन भोग की कथा सुनकर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

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BASTI/UTTAR PRADESH -चल रही नवदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के पांचवें दिन शुक्रवार को कथा पंडाल में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। आचार्य प्रदीप शास्त्री (अकोला ग्राम) ने श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत धारण करने की अद्भुत कथा सुनाई। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को दूर करने और ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी छोटी उंगली पर संपूर्ण गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। इस प्रसंग को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और “गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण भगवान की जय” के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा।

आचार्य शास्त्री ने गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि गोवर्धन पूजा का अर्थ केवल पर्वत की पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति आभार प्रकट करना है। भगवान को अर्पित छप्पन भोग का आयोजन भी किया गया, जिसमें भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर आत्मिक सुख का अनुभव किया।

कार्यक्रम के मुख्य यजमान गायत्री देवी और रामदास पांडे ने विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की। मंच पर भजन संकीर्तन के साथ श्रद्धालुओं ने “गोवर्धनधारी लाल की जय” के जयघोष लगाए। कथा स्थल पर सुंदर पुष्प सज्जा, दीपमालाएं और भक्तिमय संगीत ने वातावरण को और भी पावन बना दिया।

AFJAL QURAISHI-BASTI

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