बस्ती/उत्तर प्रदेश-आलिया क़ादरिया बरकातिया नूरिया निज़ामिया सिलसिले के संस्थापक,महान आलिम-ए-दीन और सूफी संत ख़तीबुल बराहीन हज़रत सूफी मोहम्मद निज़ामुद्दीन साहब का जीवन इस्लामी शिक्षा, आध्यात्मिकता और मानवता की सेवा का अनुपम उदाहरण है।
15 जनवरी 1928 को उत्तर प्रदेश के ज़िला सन्त कबीर नगर के गाँव मूज़ा आगिया (पोस्ट छाता) में जन्मे हज़रत सूफी मोहम्मद निज़ामुद्दीन साहब एक धार्मिक वातावरण में पले-बढ़े। आपकी वालिदा एक परहेज़गार व इबादतगुज़ार महिला थीं जिनकी दुआओं का असर आपके जीवन में साफ़ झलकता है।
प्रारंभिक शिक्षा के बाद आपने इस्लामी तालीम के लिए मेरठ, अहमदाबाद और मुबारकपुर जैसे प्रसिद्ध मदरसों में अध्ययन किया। 1952 में दारुल उलूम अशरफ़िया, मुबारकपुर से “फ़ाज़िल” की डिग्री हासिल की। आपकी परहेज़गारी और तक़्वा देखकर उलेमा ने आपको “सूफी साहब” की उपाधि दी, जो आपकी स्थायी पहचान बन गई।
आपने शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। अहमदाबाद के दारुल उलूम शाह आलम में पाँच वर्षों तक अध्यापन किया और फिर बस्ती ज़िले में स्थित दारुल उलूम तनवीरुल इस्लाम (अमर्दोभा) में बतौर शैख़ुल हदीस अपनी सेवाएँ प्रारंभ कीं, जहाँ आज भी बिना किसी वेतन के दीन की खिदमत में लगे हुए हैं।
हज़रत सूफी मोहम्मद निज़ामुद्दीन साहब के सैकड़ों शागिर्द आज भारत और विदेशों के विभिन्न धार्मिक संस्थानों में अध्यापन व प्रचार का कार्य कर रहे हैं। उनके प्रमुख शागिर्दों में मौलाना मोहम्मद इदरीस, मौलाना तफ़सीरुल क़ादरी, मौलाना हबीबुर्रहमान, और मौलाना मशाअल्लाह निज़ामी जैसे नाम शामिल हैं।
आपने 1952 में ग़ौसुल वक्त मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद हज़रत मौलाना मुस्तफ़ा रज़ा ख़ाँ बर्काती (अलैहिर्रहमा) के हाथों बैअत की और सिलसिला क़ादरिया बरकातिया नूरिया रज़विया में ख़िलाफ़त प्राप्त की। आप बाद में कई अन्य सिलसिलों से भी इजाज़त और ख़िलाफ़त हासिल कर चुके हैं।
आपका जीवन सरलता, विनम्रता और सुन्नत की पूर्ण अनुपालना का प्रतीक है। आपके लेख और तक़रीरें — दाढ़ी की अहमियत, हक़ूक़े वालिदैन, बरकाते मिस्वाक, फ़ज़ाइल-ए-रोज़ा, फ़ज़ाइल-ए-दुरूद — आज भी इस्लामी समाज को मार्गदर्शन दे रहे हैं।
आपके व्यक्तित्व पर कई किताबें लिखी जा चुकी हैं, जिनमें “दो अज़ीम शख्सियतें” (मौलाना मुबारक हुसैन मिस्बाही), “आईना-ए-मुहद्दिस-ए-बस्तवी”, और “ख़तीबुल बराहीन – एक मुनफ़रिदुल मिसाल शख्सियत” प्रमुख हैं।
हज़रत सूफी मोहम्मद निज़ामुद्दीन साहब का जीवन इस बात की मिसाल है कि जब नीयत पाक हो, इरादा मज़बूत हो और मक़सद दीन की सेवा हो, तो इंसान ख़ुद एक सिलसिला बन जाता है।
दुआ है कि अल्लाह तआला अपने प्यारे हबीब ﷺ के सदके में उन्हें लंबी उम्र, सेहत और अहले सुन्नत व जमाअत की और खिदमत की तौफ़ीक़ अता फरमाए।
रिपोर्टर-अफ़ज़ाल क़ुरैशी-बस्ती
8808210553
