जेल से बाहर निकलकर रोज काम कर सकेंगे कैदी, जेल प्रशासन ने लिया यह बड़ा फैसला
गोरखपुर: यूपी के गोरखपुर जेल प्रशासन अब सजायाफ्ता कैदियों को सुधार और पुनर्वास का नया मौका दे रहा है। जेल में अनुशासित और अच्छे आचरण वाले कैदी अब दिन में काम कर सकेंगे और शाम को अपनी बैरक में लौट आएंगे. यह पहल जेल प्रशासन की तरफ से खोले जा रहे ‘तीन पेट्रोल पंपों’ से शुरू होगी, जहां कैदी कर्मचारी के रूप में काम करेंगे. उनकी निगरानी CCTV कैमरों के जरिए की जाएगी यानी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
इस योजना का लाभ उन्हीं कैदियों को मिलेगा जिन्होंने जेल में रहकर अनुशासन का पालन किया है. महीनों तक उनकी गतिविधियों की निगरानी के बाद ही उन्हें इस कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा. चयनित कैदियों के नाम उच्चस्तरीय कमेटी को भेजे जाएंगे और मंजूरी मिलने के बाद ही उन्हें काम करने की अनुमति मिलेगी.
विदेशी जेलों से ली गई प्रेरणा
जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय के अनुसार, कई विदेशी जेलों में यह मॉडल पहले से लागू है जहां कैदी दिन में बाहर जाकर काम करते हैं और शाम को जेल लौट आते हैं. गोरखपुर जेल में भी इसी मॉडल को अपनाने की तैयारी है।
कैदियों को मानसिक तनाव से राहत: जेल की चारदीवारी में बंद रहने से होने वाले तनाव से बचाव होगा।
रोजगार का अनुभव: काम करने से उन्हें भविष्य में नौकरी पाने में आसानी होगी। समाज से दोबारा जुड़ाव: समाज के मुख्य धारा में लौटने का अवसर मिलेगा।
व्यवहार सुधार: जिम्मेदारी का अहसास होगा, जिससे अपराध की प्रवृत्ति कम होगी।
गोरखपुर जेल में पहले से ही कैदियों को खेती जैसे कार्यों में लगाया जाता रहा है। अब उन्हें पेट्रोल पंपों पर भी काम करने का मौका मिलेगा। कैदी सुबह काम पर जाएंगे जहां उनकी निगरानी के लिए ‘CCTV कैमरे’ लगाए जाएंगे। शाम को वे उसी तरह जेल लौटेंगे, जैसे किसी नई प्रक्रिया के तहत प्रवेश कराया जाता है. अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में कैदियों को अन्य संस्थानों में भी काम करने की अनुमति दी जा सकती है। इस पहल से जेल में बंद कैदियों को आत्मनिर्भर बनने और समाज में फिर स्थापित होन का नया अवसर मिलेगा।
