रमजान माह की 27वीं रात को शब ए कद्र पूरी रात जागकर रोजेदारों ने अल्लाह की इबादत की

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नगर बाजार/बस्ती-नगर बाजार एवं आस पास के तमाम ग्रामीण क्षेत्रों में रमजान माह की 27वीं रात को शब ए कद्र पूरी रात जागकर रोजेदारों ने अल्लाह की इबादत की। 

हाफिज गुलाम नबी ने बताया कि शबे कद्र की रात को की गई अल्लाह की इबादत को हजारों महीनों की इबादत से बेहतर माना जाता है। इस्लाम के पवित्र ग्रंथ कुरआन मजीद में आया है कि शबे कद्र एक हजार महीनों से अफ़ज़ल (बेहतर) है। शबे कद्र के दिन रोज़े, इबादत के साथ विशेषकर ज़कात और सदका (दान) देने का विशेष महत्व है।मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन अपने हिस्से के ज़कात का पैसा अल्लाह की राह में खर्च करते है।
उन्होंने कहा कि शब ए कद्र हमे इनाम के तौर पर मिली है।वैसे तो पूरे रमजान का महीना आखिरत की कमाई का जरिया है फिर भी इस महीने के आखरी दस दिनों मे शब ए कद्र एक विशेष महत्व और अलग स्थान रखता है जो कि हजार महीनों से बेहतर है यानी इस रात के इबादत का शवाब(पुण्य) एक महीने के इबादत से भी ज्यादा है। 

क्या है ज़कात
इस्लाम धर्म के अनुसार ज़कात को पांच में से एक आधार स्तंभ माना जाता है। हर मुस्लमान को अपने धन में से ज़कात की अदायगी ज़रूरी है। इस्लाम में रमजान के पाक महीने में हर हैसियतमंद मुसलमान पर जकात देना जरूरी बताया गया है। आमदनी से पूरे साल में जो बचत होती है, उसका 2.5 फीसदी हिस्सा किसी ज़रूरतमंद या गरीब को देना ज़कात कहा जाता है।

रिपोर्टर-अफ़ज़ाल क़ुरैशी-बस्ती

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