**एम्स में एआई की मदद से विकृत चेहरे की सर्जरी सफल**
गोरखपुर। एम्स गोरखपुर के दंत रोग विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से विकृत चेहरे को नया रूप देने में बड़ी सफलता पाई है। इस तकनीक का पहला उपयोग कुशीनगर की 11 वर्षीय छात्रा पर किया गया, जो हेमा मैंडीबुलर हाइपरप्लेशिया नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थी।
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेश कुमार ने बताया कि इस बीमारी में मरीज का चेहरा असामान्य रूप से बढ़ता और टेढ़ा हो जाता है, जिससे सांस लेने, खाने और दांतों में दिक्कत होती है। बिना चीरा-टांका लगाए की गई इस सर्जरी ने मरीज को नया जीवन दिया।
एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि अब एआई तकनीक का दंत रोग विभाग में नियमित उपयोग किया जाएगा और इसे अन्य विभागों तक भी विस्तारित किया जाएगा। एआई के इस्तेमाल से जटिल सर्जरी में समय कम लगेगा और मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा।
**कैसे काम करता है एआई:**
एआई रेडियोग्राफ और इंट्राऑरल स्कैन का विश्लेषण कर इलाज की योजना बनाता है और मरीजों को सर्जरी के बाद के परिणामों की जानकारी देता है। यह तकनीक दंत रोग चिकित्सा में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।
