नेशनल फॅमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार महिलाओं के स्तनपान का प्रतिशत घटा

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, गोरखपुर में विश्व स्तनपान सप्ताह पर जागरूकता अभियान का आयोजन
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, गोरखपुर में सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग, के सौजन्य से अगस्त के प्रथम सफ्ताह में विश्व स्तनपान दिवस मनाया गया। इसके अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डुमरी खास, समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुर और शहरी स्वास्थ्य केंद्र झरना टोला में अलग अलग दिन स्तनपान जागरूकता से सम्बंधित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया हैं।

इस अवसर पर एम्स के कार्यकारी निदेशक और सीईओ डॉ जी के पाल ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पूरी दुनिया में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया गया। शिशुओं के लिए माँ का दूध ही वास्तविक अमृत है। इसके बहुत सारे लाभ, जैसे शिशुओं का उत्तम शारीरिक विकास, मानसिक विकास आदि होते है। उन्होंने बताया कि कई बार महिलाओं द्वारा अपने शिशुओं को समुचित स्तनपान नहीं कराना एक बड़ी समस्या बन जाता है। भारत में ये समस्या उतनी ज्यादा नहीं है फिर भी शहरी क्षेत्रों में यह समस्या धीरे धीरे बढ़ रही है। इसीलिए स्तनपान के महत्व समाज में स्थापित रखने तथा इसमें आने वाली समस्याओं के निदान के लिए हर वर्ष ये सप्ताह 1-7 अगस्त तक मनाया जाता है।

सामुदायिक चिकित्सा और पारिवारिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. हरी शंकर जोशी ने बताया कि एम्स गोरखपुर के ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र डुमरी खास तथा शिवपुर में विभाग द्वारा स्तनपान सप्ताह के अवसर पर पूरे सप्ताह कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें ग्रामीण महिलाओं, आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा गांव के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षिकाओं को स्तनपान से सम्बंधित जानकारी प्रदान की गयी तथा उनके प्रश्नो का समाधान किया गया।

आज दिनांक 7 अगस्त को प्राथमिक स्वास्थ केंद्र डुमरी खास में जागरूकता अभियान में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं शामिल हुए। सामुदायिक और पारिवारिक चिकित्सा विभाग के डॉ आनंद मोहन दीक्षित ने छह माह तक सिर्फ माँ के स्तनपान पर जोर दिया और कहा कि शुरुयात के छह माह में माँ का दूध शिशु के लिए पर्याप्त होता हैं।

ग्राम पंचायत डुमरी खास के प्रधान श्री अच्छेलाल ने सभी महिलाओं और कार्यकर्ताओं को स्तनपान का महत्व बताया और कहा कि शिशुओं को उनका अमृत जरूर दे।

सामुदायिक और पारिवारिक चिकित्सा विभाग के डॉ प्रदीप खरया ने बताया कि स्तनपान के बारे सोचने तथा उसकी तैयारी कि शुरुआत तभी से हो जाती है जब कोई महिला गर्भ धारण करती है। अगर गर्भावस्था के दौरान ही स्तनपान कि तैयारियां कर ली जाये तथा इसके महत्व को समझ लिया जाये तो आगे आने वाली आधी समस्याएं पहले ही खतम हो जाती हैं।

सामुदायिक और पारिवारिक चिकित्सा विभाग के डॉ अनिल कोपरकर ने बताया कि मेडिकल छात्र-छात्राओं को सम्मलित करके अब स्तनपान जागरूकता अभियान को और तेज किया जायेगा। उन्होंने कहा कि कोई भी शिशु स्तनपान से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए एम्स के टीकाकरण केंद्र में स्तनपान के लिए एक कक्ष अलग से है जिसका नाम अमृत कक्ष है।

सामुदायिक और पारिवारिक चिकित्सा विभाग के डॉ राम शंकर रथ ने बताया कि नेशनल फॅमिली हेल्थ सर्वे 5 की रिपोर्ट के अनुसार गोरखपुर में प्रथम छह माह के स्तनपान की दर 71% है। इसको अब हम सभी लोगों के प्रयास से 100% करना हैं।

सीनियर रेजिडेंट डॉ श्री देवी ने उन तरीकों के बारे में चर्चा कि जिसको अपनाकर स्तनपान करने वाली

महिलाओं में दूध न उतरने को लेकर होने समस्या से घरेलु स्तर पर ही निपटा जा सकता है। जूनियर रेजिडेंट डॉ फैसल ने समाज में तेजी से उत्पन्न हो रहे स्तनपान के विकल्पों के विषय में चर्चा कि तथा उससे बच्चे तथा माँ के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के विषय में बताया।

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