*बिहार गोपालगंज निवासी की १२ वर्षीय किशोरी अब अपने मुंह से खाना खाने में सक्षम है ।*
मरीज़ के पिता बिहार के गोपालगंज के भोरे थाना निवासी हैं एवं दिहाड़ी मज़दूर हैं.
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, गोरखपुर के दंत शल्य विभाग ने एक जटिल सर्जरी को अंजाम दिया है. गोरखपुर निवासी १२ वर्षीय किशोरी के पिछले १० वर्ष मुँह ना खुलने, चेहरे की विकृति एवं नींद मैं थोड़ी-थोड़ी देर के लिए साँस रुकने के समस्या से ग्रसित था . किशोरी के पिता बहुत सारे डॉक्टरो एवं अस्पतालों को दिखाने के बाद भी जब समस्या बढ़ती चली गयी तब गोरखपुर एम्स के दंत रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर एवं मैक्सिलोफ़ेशियल सर्जन डा शैलेश कुमार को दिखाया . मरीज़ की गहन जाँच तथा स्कैन के बाद ये पता चला की मरीज़ एक जटील किस्म की समस्या से ग्रसित था . मरीज़ के खोपड़ी की हड्डी निचले जबड़े की हड्डी से पूरी तरहसे जुड़ गई थी . जिसकी वजह से पिछले १० वर्षों से मरीज़ मुँह ना खुलने की वजह से सिर्फ़ तरल खाने पर निर्भर था, जिसके कारण मरीज़ का स्वास्थ्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा था.
ऑपरेशन के दौरान चेहरे की नशों को बचाते हुए (एंकिलोज्ड मास) हड्डी का टुकड़ा निकाला गया ह और हड्डी दुबारा खोपड़ी से जुड़ न जाए इसके लिए मरीज के सिर के अंदर से मास के कुछ हिस्से को काट कर जबड़े के ज्वाइंट में डाला गया। इस प्रक्रिया को इंटर पोजीशनल आर्थोप्लास्टि कहते हैं।
इस बीमारी में मुंह का निचला जबड़ा खोपड़ी के हिस्से में जुड़ जाता ह, जिसे मुंह खुल नही पता है, जिसे बेहोश करने की प्रक्रिया भी जटिल हो जाती ह।इसमें मरीज के नाक के द्वारा फाइबर ऑप्टिक स्वास नली डाली गई।
ऐम्स निदेशक एवं सीईओ डा (प्रो) जी के पॉल को दंत शल्य विभाग द्वारा मरीज़ की समस्या की जानकारी दी गई. ऐम्स निदेशक के निर्देश पर ऑपरेशन की तैयारी शुरू की गई. मरीज़ की बेहोशी जाँच निश्चेतना विभाग के विभागाध्यक्ष डा वर्धन सेठ एवं एसोसिएट प्रोफेसर डा अंकिता काबी द्वारा किया . मैक्सिलोफ़ेशियल सर्जन डा शैलेश ने बताया की ऐसे मरीज़ों में बेहोशी की प्रक्रिया बहुत ही जटिल होती है , जिसके लिए विशेष उपकरण और बहुत तैयारी की ज़रूरत होती है . इस ऑपरेशन में पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डा सुबोध ने महत्वपूर्ण योगदान दिया. मरीज़ की सर्जरी पूर्ण बेहोशी मैं दंत रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर एवं ओरल एंड मैक्सिलोफ़ेशल सर्जन डा शैलेश कुमार द्वारा किया गया. ५ घंटे चली सर्जरी पूरी तरह से सफल रही. ऑपरेशन के बाद मरीज़ को डा अंकिता काबी की निगरानी में रातभर रखा गया. ऐम्स निदेशक ने डा शैलेश कुमार एवं उनकी टीम को सफल ऑपरेशन की बधाई दी. ऐम्स निदेशक द्वारा नियमित रूप से मरीज़ के स्वास्थ्य की जानकारी ली जा रही है . दंत विभाग के डा श्रीनिवास ने डाक्टरों की पूरी टीम को सफल ऑपरेशन की बधाई दी. ऑपरेशन में दंत विभाग के सीनियर रेजीडेंट डा प्रवीण कुमार एवं जूनियर रेज़िडेंट डा दिव्या पाठक, डा अंकुर पाँडे शामिल रहे . एनेस्थीसिया विभाग के सीनियर रेजीडेंट भी योगदान दिया. पूर्वांचल एवं गोरखपुर एम्स में बच्चों में इस तरह की पहला ऑपरेशन है. अभी तक ऐसे मरीज़ो को ऑपरेशन के लिए दिल्ली या लखनऊ जाना पड़ता था. . डा शैलेश ने बताया की सही समय पर अगर डॉक्टर को दिखाया जाये तो ऐसे ऑपरेशन को टाला जा सकता है.
