ट्रक मालिकों की परेशानी: व्हीलसआई GPS ट्रैकिंग में खराबी, खनन घाट में अवैध वसूली का खेल
गोरखपुर । ट्रक मालिकों को व्हीलसआई GPS ट्रैकिंग डिवाइस की लगातार खराबी और खनन घाट में रॉयल्टी कटौती के नाम पर अवैध वसूली से जूझना पड़ रहा है। कंपनी से शिकायत करने पर ग्राउंड लेवल पर कोई सुविधा नहीं मिलती, जबकि खनन व्हीलसआई GPS ट्रैकिंग लगाने वाले कर्मचारी अपना नंबर स्विच ऑफ कर गायब हो जाते हैं। इस तरह की हरकतों से आम ट्रक मालिक त्रस्त हैं और मांग कर रहे हैं कि कंपनियां सुविधाएं सुधारें।
ट्रक मालिकों का कहना है कि व्हीलसआई GPS ट्रैकिंग खनन क्षेत्र में हमेशा खराब हो जाता है। खदान में रॉयल्टी कटने के दौरान कई तरह की परेशानियां होती हैं। एक मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "जीपीएस अपडेट के नाम पर प्रति गाड़ी 200 रुपये वसूले जाते हैं। कंपनी को सब पता है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। खनन वाले सरकारी अधिकारियों से जुड़े हैं, उनका अवैध वसूली का धंधा जोरों पर है।"
कई ट्रक मालिकों ने अनुभव साझा किया कि व्हीलसआई GPS ट्रैकिंग लगी गाड़ी खनन घाट ले जाने पर तमाम दिक्कतें आती हैं। कंपनी हेल्पलाइन पर कॉल करने के बावजूद तत्काल मदद नहीं मिलती। संपर्क करने पर संबंधित व्यक्ति फोन स्विच ऑफ कर भाग जाते हैं। इससे मालिकों को आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव हो रहा है।
व्हीलसआई GPS ट्रैकिंग कंपनी और खनन घाट का खनन विभाग से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला। ट्रक मालिक संगठनों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि जीपीएस सिस्टम को विश्वसनीय बनाया जाए और अवैध वसूली रुके।
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