महापर्व छठ पूजा के सुमधुर गीतों की प्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा अब नहीं रही..
बेटे ने कहा - शारदा सिन्हा की निधन से पहले क्या थी इच्छा? बेटे अंशुमन ने सबकुछ बताया, बोले- वह बहुत कष्ट में थीं
*शारदा सिन्हा का जन्म 1 अक्टूबर 1952 को बिहार के सुपौल जिले के हुलास गांव में हुआ था. बचपन से ही संगीत में गहरी रुचि रखने वाली शारदा ने अपनी मेहनत और संगीत के प्रति जुनून से करोड़ों लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली थी*
लखनऊ। बिहार राज्य की स्वर कोकिला और छठ गीत की लोकप्रिय शारदा सिन्हा का 72 साल की आयु में निधन हो गया. पिछले तकरीबन 15 दिन से उनका दिल्लरी AIIMS में इलाज चल रहा था. उनके बेटे अंशुमन सिन्हा ने इससे पहले बताया था कि वह बोलने में भी लड़खड़ाने लगी हैं. कुछ दिनों पहले ही उन्हें आईसीयू से निकाल कर प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट किया गया था. दिल्ली एम्स से मिली जानकारी के अनुसार, शारदा सिन्हा ने रात 9:20 बजे अंतिम सांस ली.
शारदा सिन्हा की अचानक फिर से तबीयत बिगड़ी तो उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था. हालांकि, उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. कुछ दिनों पहले ही उनके बेटे अंशुमन सिन्हा ने बताया था कि शारदा सिन्हा ठीक से बोल नहीं पा रही हैं. लोगों को पहचान ले रहीं, लेकिन बात करने में उन्हें परेशानी हो रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शारदा सिन्हा के निधन पर शोक जताया है. उन्होंने X पर पोस्ट कर लिखा, ‘प्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. उनके गाए मैथिली और भोजपुरी के लोकगीत पिछले कई दशकों से बेहद लोकप्रिय रहे हैं. आस्था के महापर्व छठ से जुड़े उनके सुमधुर गीतों की गूंज भी सदैव बनी रहेगी. उनका जाना संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं. ओम शांति!’
