*17 जुलाई 2026 को पश्चिमी आकाश में चंद्रमा के निकट दिखाई देगा सबसे चमकीला ग्रह शुक्र, नीचे चमकेगा रेगुलस।*
गोरखपुर। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले खगोल प्रेमियों के लिए 17 जुलाई 2026 की शाम एक आकर्षक आकाशीय दृश्य लेकर आ रही है। सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा और सौरमंडल का सबसे चमकीला ग्रह शुक्र तथा सिंह (Leo) तारामंडल का प्रमुख तारा रेगुलस एक ही क्षेत्र में दिखाई देंगे। यह दृश्य विशेष रूप से सूर्यास्त के बाद से पश्चिमी क्षितिज का आकाश साफ़ होने एवं प्रकाश प्रदूषण से दूर होने पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा और लगभग रात 9 बजे तक इनका अवलोकन संभव रहेगा। इसके बाद ये सभी खगोलीय पिंड धीरे-धीरे पश्चिमी क्षितिज के नीचे अस्त होने लगेंगे।
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर के खगोलविद् अमर पाल सिंह ने बताया कि इस अवसर पर आकाश में शुक्र ग्रह और चंद्रमा का सुंदर संयोजन (Conjunction) देखने को मिलेगा। यद्यपि दोनों खगोलीय पिंड वास्तव में अंतरिक्ष में एक-दूसरे के निकट नहीं होंगे, बल्कि वास्तव में बे आपस में बहुत ही दूर होते हैं लेकिन कभी कभी कंजंक्शन या युति के दौरान पृथ्वी से देखने पर वे आकाश में एक-दूसरे के बहुत पास प्रतीत होंगे। इसे ही खगोल विज्ञान में संयोजन या युति कहा जाता है। ऐसे संयोजन आम लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र होते हैं, क्योंकि इन्हें बिना किसी विशेष उपकरण के भी आसानी से देखा जा सकता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस संयोजन के नीचे सिंह तारामंडल का सबसे प्रमुख और चमकीला तारा रेगुलस (Regulus) भी स्पष्ट दिखाई देगा। रेगुलस नीले-सफेद रंग का एक अत्यंत गर्म तारा है और यह सिंह तारामंडल का सबसे चमकीला सदस्य होने के साथ-साथ रात्रि आकाश के प्रमुख तारों में गिना जाता है। इस प्रकार चंद्रमा, शुक्र ग्रह और रेगुलस एक ही आकाशीय क्षेत्र में दिखाई देने से पश्चिमी क्षितिज पर अत्यंत मनोहारी दृश्य बनेगा।
खगोलविद् अमर पाल सिंह ने बताया कि 17 जुलाई को चंद्रमा अपनी वैक्सिंग क्रिसेंट (Waxing Crescent) अवस्था में रहेगा, इस दौरान चंद्रमा का पतला घुमावदार आकार भी दिखाई देगा या कुछ यूं कहें कि इस चरण में चंद्रमा का केवल एक पतला, घुमावदार प्रकाशित भाग दिखाई देता है, जबकि शेष भाग अंधकारमय रहता है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह चन्द्रमा का वैक्सिंग क्रिसेंट होगा , वैक्सिंग शब्द का अर्थ है कि चंद्रमा का प्रकाशित भाग प्रतिदिन धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जबकि "क्रिसेंट" उस पतले अर्धचंद्राकार स्वरूप को दर्शाता है, जो हंसिया जैसी आकृति का प्रतीत होता है। आने वाले दिनों में चंद्रमा का प्रकाशित भाग लगातार बढ़ता जाएगा।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस अवस्था में चंद्रमा का पतला प्रकाशित किनारा और उसके समीप चमकता हुआ शुक्र ग्रह देखने में अत्यंत आकर्षक प्रतीत होगा। यदि मौसम साफ हो और पश्चिमी क्षितिज पर बादलों का आवरण न हो, तो यह दृश्य सामान्य लोगों के लिए भी साधारण आँखों से ही आसानी से दिखाई देगा।
*क्यों होता है शुक्र ग्रह इतना चमकीला ?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि शुक्र ग्रह को प्राचीन कालीन सभ्यताओं में अक्सर "संध्या तारा" या "भोर का तारा" और पृथ्वी की बहन आदि नामों की उपमा दी गई हैं लेकिन यह वास्तव में हमारे सौर मण्डल का सबसे चमकीला ग्रह ही है जो सभी को अपनी ओर देखने को आकर्षित करता रहता है, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आधुनिक खगोलीय दृष्टि से वह तारा नहीं बल्कि एक ग्रह है। यह पृथ्वी के सबसे निकट स्थित ग्रहों में से एक है और इसके घने बादल सूर्य के प्रकाश का लगभग 70 प्रतिशत से अधिक भाग परावर्तित कर देते हैं। इसी कारण यह सूर्य और चंद्रमा के बाद आकाश में दिखाई देने वाला सबसे चमकीला प्राकृतिक खगोलीय पिंड है। इसीलिए सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में इसकी तेज चमक इसे आसानी से पहचानने योग्य बनायेगी।
*रेगुलस का भी मिलेगा साथ*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस शानदार खगोलीय संयोजन के दौरान चंद्रमा का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 7.7 के क़रीब होगा और शुक्र ग्रह का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 4.03 के क़रीब होगा एवं सिंह तारामंडल का सबसे चमकीला तारा रेगुलस का दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 1.40 के करीब होगा, इस दौरान तीनों खगोलीय पिंड एक ही सिंह तारामंडल क्षेत्र में दिखाई देंगे,जो इसको और भी खूबसूरत बनायेगा। शुक्र ग्रह और चंद्रमा के नीचे सिंह तारामंडल का प्रमुख तारा रेगुलस दिखाई देगा जोकि पृथ्वी से लगभग 79 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है,यह तारा सूर्य से कई गुना अधिक विशाल, अधिक गर्म और अधिक चमकीला भी है। रेगुलस सिंह तारामंडल के हृदय (Heart of the Lion) का प्रतिनिधित्व करता है और प्राचीन काल से विभिन्न सभ्यताओं में इसका विशेष महत्व रहा है। इस अवसर पर यह शुक्र और चंद्रमा के साथ एक सुंदर दृश्य का अनुभव कराएगा।
*कहाँ और कैसे देखें यह दृश्य?*
खगोलविद् अमर पाल सिंह के अनुसार इस खगोलीय घटना को देखने के लिए किसी विशेष दूरबीन की आवश्यकता नहीं है। यदि पश्चिमी क्षितिज खुला हो तथा प्रकाश प्रदूषण अपेक्षाकृत कम हो, तो इसे नग्न आंखों से आसानी से देखा जा सकता है। हालांकि अच्छी गुणवत्ता वाले बाइनॉकुलर या छोटी दूरबीन से देखने पर चंद्रमा का पतला प्रकाशित किनारा, उसकी सतह की बनावट तथा शुक्र ग्रह का अत्यंत चमकीला स्वरूप और अधिक स्पष्ट दिखाई देगा।
अमर पाल सिंह ने बताया कि शहरों में अत्यधिक कृत्रिम प्रकाश के कारण आकाशीय पिंडों की दृश्यता प्रभावित हो सकती है। इसलिए यदि संभव हो तो खुले मैदान, ग्रामीण क्षेत्र या कम प्रकाश प्रदूषण वाले स्थान से इस घटना का अवलोकन करना अधिक उपयुक्त रहेगा। अवलोकन के दौरान पश्चिमी दिशा का स्पष्ट क्षितिज होना भी आवश्यक है, क्योंकि तीनों खगोलीय पिंड सूर्यास्त के कुछ समय बाद ही क्षितिज के निकट दिखाई देंगे और शीघ्र ही अस्त हो जाएंगे।
*आम लोगों के लिए विशेष अवसर* ।
खगोलविद् अमर पाल सिंह ने कहा कि ऐसे खगोलीय संयोजन लोगों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच विकसित करने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करते हैं। इस प्रकार की घटनाएं यह समझने में भी सहायता करती हैं कि ग्रह, तारे और चंद्रमा अपनी-अपनी कक्षाओं में निरंतर गतिमान रहते हुए समय-समय पर पृथ्वी से देखने पर एक-दूसरे के निकट दिखाई देते हैं। यह केवल दृष्टि-रेखा (Line of Sight) का प्रभाव होता है, न कि इन खगोलीय पिंडों का वास्तविक रूप से अंतरिक्ष में एक-दूसरे के पास आ जाना।
उन्होंने लोगों से अपील की है कि यदि आपके यहां का मौसम अनुकूल रहने पर 17 जुलाई 2026 की शाम परिवार और बच्चों के साथ पश्चिमी आकाश की ओर अवश्य देखें। यह मनोहारी दृश्य न केवल प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का अनुभव कराएगा, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति नई पीढ़ी में रुचि और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का भी एक सुनहरा अवसर होगा।
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खगोलविद अमर पाल सिंह,
एस्ट्रोनॉमी एजुकेटर, वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला ( तारामण्डल) गोरखपुर,उत्तर प्रदेश,भारत।
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