नवरात्रि 2021 : जानिए मां कात्यायनी की जन्म की कहानी और पूजा मंत्र

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*जय माते मित्रो !*
*ॐ या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।* *नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥*
*चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दूलवर वाहना।* *कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानव घातिनि।।ॐ कात्यायिनी देव्ये नमः।*
आज माँ कात्यायनी की पूजा होगी। माँ कात्यायनी का जन्म कात्यायन ऋषि के घर हुआ था अतः इनको कात्यायनी कहा जाता है। इनकी चार भुजाओं मे अस्त्र शस्त्र और कमल का पुष्प है, इनका वाहन सिंह है। ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, गोपियों ने कृष्ण की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा की थी।विवाह सम्बन्धी मामलों के लिए इनकी पूजा अचूक होती है, योग्य और मनचाहा पति इनकी कृपा से प्राप्त होता है।कन्याओं के शीघ्र विवाह के लिए इनकी पूजा अद्भुत मानी जाती है। मनचाहे विवाह और प्रेम विवाह के लिए भी इनकी उपासना की जाती है। अगर कुंडली में विवाह के योग क्षीण हों तो भी विवाह हो जाता है। माता का सम्बन्ध कृष्ण और उनकी गोपिकाओं से रहा है , और ये ब्रज मंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं। गोधूली वेला के समय पीले अथवा लाल वस्त्र धारण करके इनकी पूजा करनी चाहिए। इनको पीले फूल और पीला नैवेद्य अर्पित करें, इनको शहद अर्पित करना विशेष शुभ होता है। माँ को सुगन्धित पुष्प अर्पित करने से शीघ्र विवाह के योग बनेंगे साथ ही प्रेम सम्बन्धी बाधाएँ भी दूर होंगी। माँ के समक्ष दीपक जलायें और उन्हें पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद 3 गाँठ हल्दी की भी चढ़ाएं।माँ कात्यायनी के मन्त्रों का जाप करें।
*ॐ क्लीं कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरी।*
*नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः क्लीं ॐ।।*
हल्दी की गांठों को अपने पास सुरक्षित रख लें।
अपना तेज बढ़ाने के लिए माँ कात्यायनी को शहद अर्पित करें। अगर शहद चांदी के या मिटटी के पात्र में अर्पित किया जाय तो ज्यादा उत्तम होगा। इससे आपका प्रभाव बढेगा और आकर्षण क्षमता में वृद्धि होगी। *जय माता दी।जय श्री कृष्ण। आचार्य आकाश तिवारी 9651465038*

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