गोरखपुर जिला कारागार में निरुद्ध कैदियों को रोजगार से जोड़ने के लिए जेल प्रशासन की अनोखी पहल, अब जेल में होगी मशरूम की खेती
गोरखपुर । जिला कारागार गोरखपुर पर पूर्वाचल मशरूम सेंटर के स्वतंत्र देव सिंह ने जेल रेडियों के माध्यम से कारागार में निरूद्ध बन्दियों को जेल रेडियो के माध्यम से मशरूम की खेती के माध्यम से अधिकाधिक आय अर्जित करने के तरीके बताए। उन्होंने बताया कि मशरूम की खेती जीरो बजट फार्मिंग है, जिसमें कृषि अवशेषों भूसा, पुआल, गन्ना की खोई, सरसों के डंठल आदि का प्रयोग होता है।
आयस्टर मशरूम को भूसे पर उगाया जाता है और यह 21 से 30 दिन में उत्पादन देना शुरू कर देता है और उचित देखभाल के बाद इसकी चार बार तुड़ाई हो सकती है और इस कार्य में लगाया गया भूसा पुनः पशुओं को खिलाया जा सकता है।
पैडस्टल मशरूम पुआल पर उगाया जाता है और यह मात्र 8 से 10 दिनों में उत्पादन शुरू हो जाता है और यह सबसे कम समय में आय देने लगता है।
मशरूम की खेती से पर्यावरण को नुकसान होने से बचाया जा सकता है, कृषि अवशेषों को जलाने के स्थान पर मशरूम की खेती के लिए प्रयोग किया जा सकता है। मशरूम की खेती अन्य समस्त प्रकार की कृषि से अधिक आय दे सकती है।
मशरूम की खेती जेल से छूटने वाले बन्दियों के लिए पुनर्वास का माध्यम हो सकती है, जेल से छूटने के बाद बन्दी बहुत कम समय में आय अर्जित कर सकते हैं। यह विटामिन A,B,C एवं D का अच्छा स्रोत है, इसमें प्रोटीन एवं मिनरल्स भी अच्छी मात्रा में होते हैं।
इस अवसर पर जेलर अरूण कुमार कुशवाहा, जेलर नरेश कुमार, उप जेलर विजय राय, विश्वनाथ पाण्डेय, अश्वनी कुमार उपाध्याय, अमिता श्रीवास्तव एवं कृष्णा कुमारी उपस्थित रहे।
